सियासत दार. 

ना हिंदूओ से ना मुसलमान से, 

मुझे डर लगता है कुछ लोगो के इमान से, 

कोशिश न करना हमें बाँटने की सियासत दारो, 

वरना मिटा देंगे तुम्हें इस जहाँन से .

तुम क्या हमें इनसानियत सिखाओगे, 

क्या तुम लोगों को मिलाओगे, 

यह भेदभाव की राजनीति करना बंद करो, 

मेरे वतन को तोड़ने की कोशिश की तो खाक में मिल जाओगे. 

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2 thoughts on “सियासत दार. 

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