अनजान…

हर दद॔ का कोई मज॔ है ,
तेरा दिए हुए का कोई नही ,
ना कही कोई नजर आए ,
हर जगह एक चेहरा वही ।।।
हर कली तुमसे शम॔ सार है ,
हर दिल तुम्हे पाने को बेकरार है ,
मुझे और कोई नही चाहिए ,
इस दिल को एक तेरा हि दीदार है ।।।
ना तु मुझसे अनजान है ,
ना मै तुझसे ,
बस एक ख्वाब तु है ,
रहना है इसी ख्वाब मे कहता मे खुदसे ।।।

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